स्पेशल रिपोर्ट : खेती ने बनाया कर्जदार, हर किसान परिवार पर 74,420 रुपए कर्ज! केंद्रीय कृषि मंत्री ने संसद में दी जानकारी

नई दिल्ली डेस्क। पंचायत इंडिया न्यूज़

नई दिल्ली। देश के अन्नदाताओं की आर्थिक हालत पर संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में मप्र के किसानों की तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार के डेटा के मुताबिक, मप्र में हर किसान परिवार पर औसत बकाया कर्ज 74,420 रुपए है। यह आंकड़ा लगभग राष्ट्रीय औसत (74,121 रुपए) के बराबर है, लेकिन यहां के किसान दक्षिण भारत और पड़ोसी राजस्थान के मुकाबले कम कर्जदार हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टीएमसी सांसद कालीपद सरन खेरवाल के एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। डेटा का एनालिसिस करने पर पता चलता है कि कर्ज के मामले में मप्र के किसान कई दूसरे राज्यों से बेहतर स्थिति में हैं। पड़ोसी राजस्थान में जहां हर किसान परिवार पर कर्ज का बोझ 113,865 रुपए है, वहीं मप्र में यह 74,420 रुपए है। हालांकि, छत्तीसगढ़ (21,443 रुपये) जैसे छोटे राज्यों के मुकाबले मप्र के किसान ज्यादा कर्जदार हैं। दक्षिणी राज्यों के किसान सबसे ज्यादा कर्जदार हैं।

मप्र में किसान कल्याण वर्ष और जीरो इंटरेस्ट स्कीम
बढ़ते कर्ज और खेती की लागत को देखते हुए मप्र में मोहन यादव सरकार ने 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
बिना ब्याज के लोन: राज्य में किसानों को जून 2026 तक 0 फीसदी ब्याज पर फसल लोन मिलता रहेगा। जो किसान समय पर अपना लोन चुकाएंगे, उन्हें 4 फीसदी की अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी भी मिलेगी।
डिफॉल्टरों के लिए राहत: सरकार ने कोऑपरेटिव बैंकों के उन किसानों को मुख्यधारा में वापस लाने की योजना बनाई है, जिन्होंने लोन की वजह से डिफॉल्ट किया था।
सिंचाई बढ़ाना: नर्मदा-क्षिप्रा, दूसरे नदी जोड़ो प्रोजेक्ट के जरिए सिंचाई का एरिया बढ़ाना और खेती को फायदेमंद बनाना लक्ष्य है।

केसीसी का कर्ज 10 लाख करोड़ के पार
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 30 सितंबर, 2025 तक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत बकाया रकम 10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि, सरकार ने साफ़ किया कि 1 फरवरी, 2026 तक का सही डेटा मौजूद नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वे (एनएसएस 77वां राउंड) 2019 में किया गया था। डेटा के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) क्रेडिट का सबसे बड़ा सोर्स बनकर उभरे हैं। मप्र में ग्रामीण बैंकों, कोऑपरेटिव सोसाइटियों के जरिए केसीसी का डिस्ट्रीब्यूशन भी तेजी से बड़ा है।

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