ब्यूरो रिपोर्ट पन्ना। पंचायत इंडिया न्यूज़
पन्ना। भारत सरकार की महत्वपूर्ण एवं बहुउद्देशीय हर घर नल-जल योजना की स्थिति चिंताजनक है. पन्ना के ग्राम बराछ में 2 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद जमीनी हकीकत अलग है. यहां योजना कागजों पर तो संचालित दिख रही है लेकिन जमीनी स्तर पर टूटे पाइप, टूटे नल और उन पाइपों में धूल उड़ते नजर आ रहा है. जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी परियोजना
यह परियोजना लगभग 2 करोड़ 45 लाख रुपए से बनकर तैयार हुई है. बराछ ग्राम के बाहर पंचवटी मंदिर के पास एक विशाल हजारों लीटर की पानी टंकी भी निर्मित कराई गई है. पंचायत के लगभग सभी घरों में नल-जल के कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन यह कनेक्शन सिर्फ देखने के लिए लगे हुए हैं. इन नलों से पानी नहीं आ रहा है और कुछ कनेक्शन टूटे पड़े है तो कुछ उखड़ गए हैं.
पुराने जल स्रोतों की ओर लौट गए ग्रामीण
स्थानीय निवासी राम रतन रजक ने बताया, “पानी की टंकी एक दिन सिर्फ चालू हुई थी. जिसमें टंकी को धोकर साफ किया गया था. पानी की सप्लाई भी की गई थी, लेकिन पानी की सप्लाई घरों तक पहुंची ही नहीं है. अब लोग अपनी जरूरत के लिए पुरानी जल स्रोतों जैसे कुएं, पर्सनल और नलकूपों से पूरी कर रहे हैं. 2 करोड़ की परियोजना से लोगों को कोई लाभ नहीं पहुंचा है.
विभाग ने जारी किया पूर्णता प्रमाण पत्र
आधी अधूरी परियोजना होने के बावजूद पंचायत ने हैंडओवर ले लिया और पूर्णता का सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया. जबकि पूरी परियोजना अभी तक सही ढंग से गांव में संचालित तक नहीं हुई है और गांव के घरों तक नल-जल नहीं पहुंच रहा है. वहीं इसके उलट सरकारी आंकड़ों में यह परियोजना पूरी तरह संचालित दिख रही है और घरों तक नल से जल पहुंच रहा है.
6 लाख का बिजली बिल बकाया
जब इस विषय में पंचायत प्रतिनिधि संतोष प्रजापति से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया, “कुछ दिनों के लिए चालू हुई थी, कुछ समय चली और फिर बंद हो गई. यह परियोजना फिर से चालू करेंगे, लेकिन चालू नहीं हुई. अभी यह बंद है और इसके निर्माण एवं पाइपों के कनेक्शन में पंचायत का 16 लाख रुपए का बिजली का बिल आया है जोकि अभी बकाया है. क्योंकि पंचायत के पास बजट नहीं है. ठेकेदार द्वारा झटका मारकर पूर्णता का सर्टिफिकेट जारी करवा लिया गया है. वह कहते रहे पूर्ण कर देंगे लेकिन अभी यह परियोजना बंद पड़ी है.”
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के जिला अधिकारी संचित क्षेत्रपाल ने बताया कि “संबंधित पंचायत को नीति अनुसार परियोजना का संचालन 3 महीने तक करके हैंडओवर कर दिया गया है. अब उसको चलाना और संधारण करना पंचायत का दायित्व है.
