ब्यूरो रिपोर्ट जबलपुर। पंचायत इंडिया न्यूज़
जबलपुर। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन का उद्देश्य देश के हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। वर्ष 2019 में हुए सर्वे के दौरान जबलपुर जिले की तस्वीर चिंताजनक सामने आई थी। कुल 2,21,284 परिवारों में से 1,88,173 परिवार ऐसे थे, जिनके घरों तक नल से पीने का पानी नहीं पहुंच रहा था। यानी उस समय ग्रामीण क्षेत्र में मात्र 14 प्रतिशत परिवार ही जल के मामले में आत्मनिर्भर थे, जबकि 84 प्रतिशत आबादी को मूलभूत सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा था।
इस स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने जबलपुर जिले के लिए लगभग 950 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया। योजना के क्रियान्वयन के लिए दो प्रमुख मॉडल तैयार किए गए। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत के अनुसार पहला मॉडल “सिंगल विलेज स्कीम” था, जिसमें प्रत्येक गांव में बोरवेल के जरिए पानी निकालकर उसे टंकी में संग्रहित किया जाना और फिर पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाना शामिल था। इस योजना को लेकर दावा किया गया है कि लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष गांवों में भी जल्द जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

दूसरा मॉडल “मल्टीपल विलेज स्कीम” के रूप में लागू किया गया, जिसमें बड़े जलस्रोतों का निर्माण कर पाइपलाइन के जरिए कई गांवों को जोड़ा जाना था। जबलपुर में इस प्रकार की चार प्रमुख परियोजनाएं प्रस्तावित की गईं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक केवल एक ही परियोजना, पायली योजना, आंशिक रूप से पूरी हो पाई है। इस परियोजना में बरगी बांध से पानी लेकर उसे विभिन्न गांवों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, जबकि शेष तीन परियोजनाएं अभी भी अधूरी पड़ी हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में जिले के 1,20,670 घरों तक नल के माध्यम से पानी पहुंच रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि योजना शुरू होने के कई वर्षों बाद भी लगभग एक लाख परिवार आज भी इस सुविधा से वंचित हैं। सीईओ अभिषेक गहलोत स्वीकार करते हैं कि मल्टीपल विलेज स्कीम में फंड की कमी, तकनीकी बाधाएं और ठेकेदारों की धीमी कार्यप्रणाली जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिसके कारण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है।
वहीं सिंगल विलेज स्कीम की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। कई गांवों में निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। पनागर तहसील के पोनिया गांव इसका उदाहरण है, जहां टंकी और पाइपलाइन तो तैयार हैं, लेकिन नल सूखे पड़े हैं।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही समस्या और गंभीर हो जाती है। जबलपुर के अधिकांश क्षेत्रों में पथरीली जमीन होने के कारण जलस्तर काफी गहराई पर चला जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जबकि उनके घरों तक पहुंची पाइपलाइन केवल एक अधूरी उम्मीद बनकर रह जाती है।
