मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं की नई व्यवस्था, अब ग्राम पंचायतें करेंगी नल-जल योजनाओं का संचालन

भोपाल से दीपेश वर्मा की रिपोर्ट। पंचायत इंडिया न्यूज़

भोपाल। मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल योजना के तहत घरों में पेयजल का निरंतर संचालन हो सके, इसके लिए सरकार ने नल-जल योजनाओं की नई व्यवस्था लागू की है। मप्र के ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति के लिए बनाई गईं नल जल योजनाओं का संचालन पंचायतें करेंगी। इनके सहयोग के लिए पानी समितियां बनाई जाएंगी, जिसके अध्यक्ष सरपंच होंगे। इसमें 50 प्रतिशत महिलाओं को रखना अनिवार्य होगा। पहली बार नए कनेक्शन पर जन सहयोग राशि लेने का प्रविधान किया गया है। यह एक से लेकर दस हजार रुपये होगी। पहले से जिन्हें कनेक्शन दिए जा चुके हैं, उनसे किस्तों में राशि ली जाएगी। मासिक जल कर 60 से 200 रुपये तक होगा। इसे नहीं देने वाले उपभोक्ता पर बकाया राशि के पांच से दस प्रतिशत तक अर्थदंड लगाया जा सकेगा।

गौरतलब है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत 18 हजार से अधिक योजनाएं बनाई गई हैं। पहले इनका संचालन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा करने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए दो हजार करोड़ रुपये से अधिक मांगे गए थे। इस पर वित्त विभाग की आपत्ति थी कि जब विकसित भारत जी राम जी सहित अन्य योजनाओं में राशि का प्रावधान है तो प्रदेश के राजकोष पर भार क्यों डाला जाना चाहिए। कैबिनेट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद योजना के संचालन का जिम्मा पंचायतों को सौंपने का निर्णय लिया। विभाग ने इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत (ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन) नियम 2026 बनाए हैं।

पानी समितियों को अंत्योदय, विधवा और दिव्यांगजन परिवारों का मासिक शुल्क पांच से 10 प्रतिशत कम करने का अधिकार भी होगा। जल संरक्षण के लिए अपव्यय रोकने अर्थदंड का प्रविधान किया है, यह दो सौ से पांच रुपये तक होगा। लगातार अपव्यय प्रमाणित होने पर कनेक्शन काट दिया जाएगा। योजना के संचालन के लिए मध्य प्रदेश पंचायत (ग्रामीण नल जल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन) नियम 2026 तैयार कर आपत्ति-सुझाव मांगें हैं। ग्राम पंचायत नल जल योजना के संचालन, संधारण, रखरखाव, मरम्मत, उन्नयन सुनिश्चित करेगी। समय पर जलापूर्ति, पेयजल के अपव्यय को रोकना, क्षतिग्रस्त, टूटी-फूटी पाइप लाइन, कनेक्शन की मरम्मत, ग्राम के छूटे हुए परिवारों को मांग के अनुसार नए कनेक्शन देना देना भी इसका ही दायित्व होगा। जलकर का निर्धारण, पंपिंग के लिए विद्युत बिलों का प्रतिमाह भुगतान, जल संरक्षण के काम भी पंचायतों की देख-रेख में होंगे। पंप संचालन के लिए वाल्व सह पंप ऑपरेटर की सेवाएं ली जा सकेंगी। पारिश्रमिक कार्य के आधार पर या उपभोक्ता से वसूले गए जल प्रभार के आधार पर निर्धारित होगा। गांवों में गठित पानी समितियां जलकर और जन सहयोग शुल्क की अनुशंसा करेंगी। पंचायतें इन्हीं सिफारिशों के आधार पर शुल्क तय करेंगी। नए कनेक्शन पर एकमुश्त सहयोग राशि ली जाएगी, जबकि पहले से जुड़े उपभोक्ताओं से यह राशि किस्तों में वसूली जा सकेगी। जलकर की दरें 60 रुपये से 200 रुपये प्रति माह तक निर्धारित की गई हैं, जबकि संस्थानों और गैर-घरेलू उपयोग के लिए अलग दरें लागू होंगी। वहीं जन सहयोग राशि अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों के लिए एक हजार रुपये, अन्य परिवारों के लिए 2,500 रुपये और औद्योगिक संस्थानों के लिए 10 हजार रुपये तक निर्धारित की गई है। यह नई व्यवस्था ग्रामीण जल प्रबंधन को स्थानीय स्तर पर मजबूत बनाने, जवाबदेही तय करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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