भोपाल से दीपेश वर्मा की रिपोर्ट। पंचायत इंडिया न्यूज़
भोपाल। अक्सर टैक्स चोरी या समय पर टैक्स न भरने की खबरें सामने आती रहती हैं, जिनमें आमतौर पर बड़े शहरों के पढ़े-लिखे और संपन्न वर्ग के लोग भी शामिल होते हैं। ऐसे में यह तथ्य चौंकाने वाला है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के एक पिछड़े आदिवासी क्षेत्र कुंडम ब्लॉक के लोगों ने संपत्ति कर भुगतान में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक जागरूकता दिखाई है। वहीं कुल वसूली गई राशि के मामले में जबलपुर ब्लॉक प्रदेश में शीर्ष स्थान पर है।
दरअसल, 73वें संविधान संशोधन (1992) के तहत देश में आत्मनिर्भर पंचायत की परिकल्पना की गई थी, जिसे 24 अप्रैल 1993 से लागू किया गया। इस संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देते हुए ग्राम सभा को पंचायती राज व्यवस्था की आधारशिला बनाया। इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश में वर्ष 2022 से पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास तेज किए गए। इसके तहत पंचायती राज से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई।
पंचायती राज कानून के अनुसार ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में 12 प्रकार के टैक्स वसूलने का अधिकार है। इसका उद्देश्य यह है कि पंचायतें अपनी आय स्वयं अर्जित करें और स्थानीय विकास कार्यों पर स्वतंत्र रूप से खर्च कर सकें। सरपंच, सचिव और अन्य पंचायत कर्मचारी राज्य सरकार के प्रतिनिधि नहीं बल्कि ग्राम सरकार के हिस्से होते हैं। ऐसे में यदि पंचायत के पास अपनी आय का स्रोत हो, तो वह अपने बजट का निर्माण और उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कर सकती है, बशर्ते उसमें पारदर्शिता बनी रहे।
वर्ष 2022 के पंचायत चुनावों के बाद राज्य सरकार ने नगर निगम और नगर पालिकाओं की तर्ज पर ग्राम पंचायतों को भी टैक्स वसूली के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि यह टैक्स अनिवार्य नहीं है, लेकिन पंचायतों को यह अधिकार दिया गया है कि वे स्थानीय सेवाओं के आधार पर राजस्व एकत्र कर सकें। इसी क्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने पूरे प्रदेश में टैक्स संग्रह की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से लागू किया।
आंकड़ों के अनुसार, ‘पंचायत दर्पण’ पोर्टल के माध्यम से पूरे मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 65 हजार लोगों ने ग्रामीण संपत्ति कर जमा किया है, जिससे करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपए की राशि एकत्र हुई है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत के मुताबिक यह टैक्स दर काफी कम है—लगभग 1 लाख रुपए की संपत्ति पर मात्र 200 रुपए। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में टैक्स भुगतान की आदत विकसित करना है।
इस अभियान में जबलपुर जिला सबसे आगे रहा है, जहां अकेले 34 हजार ग्रामीणों ने अपनी संपत्ति पर टैक्स जमा किया। यह संख्या पूरे प्रदेश के कुल टैक्सदाताओं का आधे से भी अधिक है। खास बात यह है कि कुंडम जैसे आदिवासी और अपेक्षाकृत पिछड़े ब्लॉक ने टैक्स भुगतान के मामले में उल्लेखनीय जागरूकता दिखाई है और प्रदेश में सर्वाधिक टैक्सदाता इसी क्षेत्र से सामने आए हैं।
वहीं कुल राशि के लिहाज से जबलपुर ब्लॉक ने सबसे अधिक राजस्व संग्रह किया है। इसका कारण यह भी है कि प्रशासन ने केवल आवासीय संपत्तियों तक सीमित न रहकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होटल, फार्महाउस, वेयरहाउस और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को भी इस अभियान में शामिल किया। परिणामस्वरूप लोगों ने स्वेच्छा से पंचायत को टैक्स देने में रुचि दिखाई, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
