स्पेशल रिपोर्ट : पंचायती राज व्यवस्था में नारी शक्ति का अभूतपूर्व दबदबा, मध्यप्रदेश की पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी 52.84 फीसदी

भोपाल से दीपेश वर्मा की रिपोर्ट। पंचायत इंडिया न्यूज़

भोपाल। देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण संशोधन बिल लाया गया था, जो पारित नहीं हो पाया। अगर यह बिल पास हो जाता तो बिल के पारित होने के बाद वर्ष 2029 से महिलाओं की संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत भागीदारी हो जाती। लेकिन नारी शक्ति के सशक्तिकरण का मप्र पहले से ही रोल मॉडल बना हुआ है। मप्र में पंचायती राज व्यवस्था में नारी शक्ति का अभूतपूर्व दबदबा देखने को मिल रहा है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक सीटों पर महिला प्रतिनिधि निर्वाचित हैं। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों में महिलाओं की भागीदारी 52.84 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

मप्र ने 2007 से ही त्रि-स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। तब से यहां पंचायती राज व्यवस्था में 52 फीसदी से ज्यादा पद महिलाएं संभाल रही हैं। ग्राम सरकारों के साथ ही नगर सरकार भी महिलाएं बखूबी चला रही हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है। राज्य में ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत स्तर तक 2 लाख 90 हजार 41 निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधि अपने दायित्वों को निभा रही है, यह पंचायती राज में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का 52.84 प्रतिशत हैं।

इनमें 26 जिला पंचायतों की कमान महिलाओं के पास बतौर अध्यक्ष के रूप में है, जबकि 444 जिला पंचायत सदस्य महिलाएं है। यह दोनों संख्या पुरुषों के अनुपात में 50 से 53 प्रतिशत तक ज्यादा है। इसी तरह 179 जनपद अध्यक्ष व 3425 जनपद सदस्य महिलाएं हैं। जबकि राज्य की 11683 पंचायतों को अध्यक्ष के रूप में महिला प्रतिनिधियों द्वारा चलाया जा रहा है। महिला पंचों की संख्या भी 1 लाख 93 हजार 284 है।

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