संडे स्पेशल : मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव 2027 की तैयारी का पहला चरण शुरू, 18 जून को आएगी अंतिम मतदाता सूची, 2022 परिसीमन के आधार पर ही होंगे 2027 चुनाव!

भोपाल से दीपेश वर्मा की रिपोर्ट। पंचायत इंडिया न्यूज़

भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर अब तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों के लिए फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। इस प्रक्रिया में 1 जनवरी 2026 को आधार तिथि माना गया है, यानी इसी तारीख के अनुसार मतदाताओं की उम्र और पात्रता तय की जाएगी। आयोग के इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आगामी चुनाव पुराने परिसीमन, यानी वर्ष 2022 में तय सीमाओं के आधार पर ही कराए जाएंगे और नए सिरे से परिसीमन फिलहाल नहीं होगा।

आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति के साथ जिला स्तर पर प्रशिक्षण का कार्य 27 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 15 मई को प्रारूप फोटोयुक्त मतदाता सूची का सार्वजनिक प्रकाशन किया जाएगा, ताकि आम नागरिक इसे देख सकें। इस सूची पर 25 मई तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। यानी यदि किसी का नाम छूट गया हो, गलत दर्ज हो या किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची में हो, तो उसे सुधरवाने का यह अवसर होगा। प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों का निराकरण 30 मई तक किया जाएगा और अंततः 18 जून 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।

यह पूरी प्रक्रिया इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जा सकेगा। नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, स्थान परिवर्तन होने पर पता अपडेट करना, फोटो में सुधार करना और अपात्र नामों को हटाना—ये सभी कार्य इसी पुनरीक्षण के तहत किए जाएंगे। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी काम समयसीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ किए जाएं, ताकि चुनाव के समय किसी प्रकार की शिकायत या विवाद की स्थिति न बने।

जहां एक ओर मतदाता सूची का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं परिसीमन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। सामान्य तौर पर पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले परिसीमन किया जाता है, ताकि आबादी के अनुसार वार्डों की संख्या और सीमाएं संतुलित रह सकें। परिसीमन से कई बार वार्डों की सीमाएं बदल जाती हैं, नए वार्ड बनते हैं और कुछ पुराने खत्म हो जाते हैं, जिससे चुनावी समीकरण भी बदलते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा।

दरअसल, देश में चल रही जनगणना प्रक्रिया के कारण 31 दिसंबर की मध्यरात्रि से प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब जनगणना पूरी होने तक नए जिले, तहसील या नगरीय इकाइयों का गठन नहीं किया जा सकेगा और न ही किसी क्षेत्र की सीमाओं में बदलाव संभव होगा। जनगणना दो चरणों में होगी, जिसमें पहले चरण में अप्रैल से सितंबर के बीच मकानों की सूची और आवास से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में फरवरी 2027 में वास्तविक जनसंख्या गणना की जाएगी। ऐसे में परिसीमन की प्रक्रिया फिलहाल पूरी तरह से ठप हो गई है।

हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले परिसीमन कराने की पहल की थी। जुलाई 2025 में आयोग ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजकर नए परिसीमन आयोग के गठन की सिफारिश भी की थी, ताकि समय रहते नगरीय निकायों और पंचायतों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जा सके। आयोग को उम्मीद थी कि सरकार जल्द निर्णय लेकर प्रक्रिया शुरू कर देगी, लेकिन करीब नौ महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजा यह हुआ कि प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज होने के बाद अब यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है।

ऐसे में अब पूरी तरह तय हो चुका है कि वर्ष 2027 के नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव वर्ष 2022 के परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएंगे। पिछली बार ये चुनाव जुलाई-अगस्त 2022 में संपन्न हुए थे। वर्तमान स्थिति में आयोग की प्राथमिकता मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारु तरीके से संपन्न हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!