भोपाल से दीपेश वर्मा की रिपोर्ट। पंचायत इंडिया न्यूज़
भोपाल। मध्यप्रदेश में जनगणना का पहला चरण 1 मई से शुरू होने जा रहा है. प्रदेश में 1 लाख 70 हजार अधिकारी कर्मचारी अगले एक माह तक घर-घर पहुंचेंगे और मकानों का सूचीकरण और उनकी गणना करेंगे. इस दौरान कर्मचारी परिवारों से 33 आसान सवाल पूछकर जनगणना का फार्म भरेंगे. जनगणना विभाग के डायरेक्टर कार्तिकेय गोयल ने बताया, ”जनगणना के दौरान दी जाने वाली जानकारी का उपयोग सिर्फ योजनाओं के निर्माण में होता है. इस जानकारी के आधार पर मिलने वाली किसी भी सरकारी योजना के लाभ पर असर नहीं पड़ेगा. जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा.”
मकान का क्या उपयोग, जानकारी ली जाएगी
डायरेक्टर कार्तिकेय गोयल ने बताया कि, ”जनगणना के पहले चरण में 1 मई से मकान सूचीकरण और मकानों की गणना होगी. इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे. इसमें देखा जाएगा कि मकान व्यवसायिक उपयोग में है या रहवास के लिए उपयोग किया जा रहा है. मकानों की गणना के दौरान परिवार से उनकी जानकारी ली जाएगी. इस दौरान आसान 33 सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन मुखिया के अलावा किसी का भी नाम नहीं पूछा जाएगा. जनगणना के लिए प्रदेश के 1 लाख 70 हजार अधिकारी कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया गया है.

नहीं मांगे जाएंगे कोई दस्तावेज
डायरेक्टर कार्तिकेय गोयल कहते हैं कि, ”जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से कोई भी दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा. इसलिए जनगणना के दौरान कोई भी डाॅक्युमेंट निकालकर न रखें. न ही इसके लिए किसी से कोई शुल्क लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि, ”जनगणना के दौरान प्राप्त होने वाली जानकारी पूरी तरह से गोपनीय है. यह इंक्रप्टिड डाटा होता है, जो लीक नहीं हो सकता.” उन्होंने कहा कि, ”जनगणना से प्राप्त होने वाले डाटा के आधार पर लोगों को मिलने वाले किसी भी सरकारी योजना से बाहर नहीं किया जाएगा. क्योंकि प्राप्त होने वाला डाटा के आधार पर ही आगामी योजनाएं तैयार होती है, 1872 से जनगणना शुरू होने के बाद से ही इसका उपयोग सिर्फ योजनाओं के लिए होता है.”
स्व-गणना में 5.81 परिवारों ने भरी जानकारी
जनगणना के पहले चरण के पहले 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्वगणना का अवसर दिया गया, इसमें परिवार ऑनलाइन तरीके से अपनी जानकारी भर सकते थे. इस दौरान प्रदेश भर में 5 लाख 81 हजार 152 परिवारों ने इसमें हिस्सा लेते हुए ऑनलाइन जनगणना की जानकारी दी है. ऑनलाइन जनगणना में हिस्सा लेने के मामले में रायसेन टाॅप पर रहा. रायसेन के 90 हजार 769 लोगों ने स्वगणना की है.
मंदसौर में 82195, राजगढ़ में 41366, सिवनी में 24320, उज्जैन में 18836 परिवारों ने स्वगणना में हिस्सा लिया है. हालांकि इस मामले में बड़े शहर पीछे रह गए. राजधानी भोपाल में 14518 परिवारों ने ही स्वगणना में हिस्सा लिया, जबकि इंदौर में 9612, जबलपुर में 13464, ग्वालियर में 6024 लोगों ने स्वगणना की है. स्वगणना में सबसे कम उत्साह निवाडी के परिवारों ने दिखाया. निवाडी में सिर्फ 556 लोगों ने स्वगणना की है, जबकि आगर मालवा में 979 परिवार, सीधी में 1246, टीकमगढ़ में 1114, मुरैना में 1517 परिवारों ने स्वगणना की है.
