“कागजों में बहता ‘नल-जल’, हकीकत में बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण, पन्ना के बडेरा गांव में गहराया जल संकट”

ब्यूरो रिपोर्ट पन्ना। पंचायत इंडिया न्यूज़

पन्ना। गर्मियों की शुरुआत के साथ ही देशभर में जल संकट की खबरें सामने आने लगी हैं। सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित किए जाने के बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव बना हुआ है। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से सामने आया है, जहां सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं दिख रही हैं।

पन्ना जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धरमपुर के ग्राम बडेरा में ग्रामीण गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। गांव में लगे चारों हैंडपंप पिछले कई महीनों से खराब पड़े हैं, जिनकी अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है। इसके साथ ही नल-जल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन और बनाई गई पानी की टंकी भी शुरू नहीं हो सकी है, जिससे यह पूरी व्यवस्था केवल दिखावे तक सीमित होकर रह गई है।

स्थिति यह है कि ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए एक निजी खेत में लगे बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
गांव के निवासी राहुल मिश्रा के अनुसार, “पिछले कई महीनों से पानी की भारी समस्या बनी हुई है। गांव के चारों हैंडपंप खराब हैं। जब मिस्त्री से सुधार की बात की गई तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे हैंडपंप काम नहीं कर पा रहे हैं। 14 पाइप डालने के बावजूद पानी नहीं निकल रहा है, और यदि इससे अधिक पाइप डाले जाते हैं तो संचालन में भी कठिनाई आती है।”

उन्होंने आगे बताया कि नल-जल योजना के तहत गांव में पाइपलाइन और टंकी तो बनाई गई है, लेकिन अब तक उसे चालू नहीं किया गया है। मजबूरी में ग्रामीण एक व्यक्ति के निजी बोर से पानी लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।

इस संबंध में जब पीएचई विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संचित क्षेत्रपाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयशंकर तिवारी ने बताया कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब संज्ञान में आने के बाद वे संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर जल्द समाधान कराने का प्रयास करेंगे।
गांव में पेयजल संकट की यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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