भ्रष्टाचार पर वार : आदिवासी महिला की शिकायत ने खोली सिस्टम की पोल, 50 हजार की रिश्वत लेते पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार

ब्यूरो रिपोर्ट छतरपुर। पंचायत इंडिया न्यूज़

छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में चल रही केन-बेतवा लिंक परियोजना के बीच भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक आदिवासी महिला की हिम्मत ने रिश्वतखोरी के पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। मुआवजा दिलाने और बढ़ाने के नाम पर पटवारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पटवारी को 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार, केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत छतरपुर जिले के लगभग 14 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं, जिनके प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये का पुनर्वास पैकेज दिया जा रहा है। इसी मुआवजा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।
बिजावर क्षेत्र के नेगुवा गांव की रहने वाली आदिवासी महिला सगुनती ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पदस्थ पटवारी राहुल अग्रवाल ने मुआवजा राशि दिलाने के नाम पर उससे कुल 1 लाख 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। महिला के अनुसार, आरोपी पटवारी पहले ही 40 हजार रुपये ले चुका था और शेष 90 हजार रुपये की मांग कर रहा था। वह बार-बार यह कहकर दबाव बना रहा था कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो मुआवजा राशि वापस कर दी जाएगी।
पटवारी की लगातार मांग और धमकियों से परेशान होकर महिला ने साहस दिखाते हुए सागर लोकायुक्त से शिकायत की। शिकायत की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की।
निर्धारित योजना के तहत आरोपी पटवारी को छतरपुर कलेक्टर कार्यालय के पास रिश्वत लेते समय पकड़ा गया। जैसे ही महिला ने 50 हजार रुपये आरोपी को दिए, मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर ट्रैफिक थाना ले जाया गया, जहां आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई।
लोकायुक्त सागर की टीआई रोशनी जैन ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत जिन परिवारों के 18 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य हैं, उन्हें 12.50 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। इसी राशि को खाते में डलवाने के एवज में आरोपी पटवारी द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी।
पीड़ित महिला सगुनती ने बताया कि पटवारी द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था और कहा जा रहा था कि बिना पैसे दिए मुआवजा नहीं मिलेगा। उसने यह भी दावा किया कि आरोपी पटवारी इस तरह की वसूली अन्य ग्रामीणों से भी कर चुका है।
महिला की शिकायत और सटीक कार्रवाई ने न केवल एक भ्रष्ट अधिकारी को बेनकाब किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जागरूकता और साहस से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जीती जा सकती है।

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